मध्यमवर्गीय परिवार के लड़के।।

बचपन से सीखा सरकारी नौकरी ।

बिता दी जवानी सरकारी नौकरी ।

मिल गई सरकारी नौकरी तो सब ने देखा सरकारी नौकरी।

ना मिली तो देखा सब ने सरकारी नौकरी ।

पर न देखा किसी ने लड़के की जिम्मेदारी।

बीत गई उमर न जी पाए जवानी न जी पाए बचपन सब ने देखा सरकारी नौकरी।

अब आई जिम्मेदारी न निभा पाए ज़िमेदारी।

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